मुम्बई। अनिल धीरुभाई अम्बानी समूह की कम्पनी रिलायंस पावर ने अपने निवेशकों को हर पांच शेयरों पर तीन बोनस शेयर देने की घोषणा की है।कम्पनी के निदेशकमंडल की आज यहां हुई बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। बैठक में लिए गए फैसले के बारे में कम्पनी के अध्यक्ष अनिल अम्बानी ने पत्रकारों को बताया कि निवेशकों को हर पांच शेयरों पर तीन बोनस शेयर दिए जाएंगे। कम्पनी ने पहले ही घोषणा की है कि बोनस में मिलने वाले शेयर निःशुल्क होंगे।
अम्बानी ने बताया कि बोनस शेयर कम्पनी के प्रवर्तकों को नहीं मिलेंगे। गौरतलब है कि कम्पनी के प्रवर्तकों के पास ही करीब 90 प्रतिशत शेयर है।अम्बानी ने कहा कि इस घोषणा से रिलायंस एनर्जी के शेयरधारकों को कोई फर्क न पड़े इसके लिए वह इस कम्पनी के शेयरधारकों को ढाई प्रतिशत व्यक्तिगत शेयर देने की पेशकश करेंगे।
बोनस इश्यू के बाद खुदरा निवेशकों के लिए शेयर की कीमत 269 रुपए और अन्य निवेशकों को 281 रुपए पड़ेगी। कम्पनी ने आईपीओ के जरिए बेचे गए शेयर की कीमत 450 रुपए निर्धारित की थी जबकि खुदरा निवेशकों को 20 रूपए की छूट दी गई थी। इस समय कम्पनी के कुल 10 प्रतिशत शेयर खुदरा निवेशकों के पास है जो बोनस इश्यू के बाद बढ़कर 15 प्रतिशत हो जाएंगे।कम्पनी के अध्यक्ष ने बताया कि शेयरों के सूचीबद्ध होने के बाद निदेशकमंडल ने विभिन्न घटनाओं पर गौर किया और गहन विचार विमर्श के बाद बोनस शेयर जारी करने का फैसला लिया। उन्होंने खुदरा निवेशकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
अम्बानी ने शेयर सूचीबद्ध होने के दिन का जिक्र करते हुए कहा कि कोई ताकत उनके शेयरों के दाम नीचे गिराने के लिए सक्रिय थी तभी तो बेल बजने के महज चार मिनट बाद ही शेयरों के दाम 540 से गिर कर 380 पर आ गए। समूह की रिलायंस इंफ्राटेल समेत अन्य कम्पनियों के प्रस्तावित आईपीओ के बारे में उन्होंने कहा कि वह अपने हिसाब से चलता रहेगा।गौरतलब है कि करीब 11,560 करोड़ रुपए के शेयरों के लिए इसे आईपीओ बाजार से साढ़े सात लाख करोड़ रुपए मिले थे। लेकिन जब 11 फरवरी को यह सूचीबद्ध हुआ तो सारा उत्साह गायब था। हालांकि इसका शेयर 547.8 रुपए पर सूचीबद्ध हुआ पर कुछ सेकंड में ही में यह तेजी गायब हो गई और सत्र के अंत में 372.5 रुपए पर बंद हुआ जो कि इश्यू मूल्य 450 रुपए के मुकाबले काफी कम था।
इस उठापटक से चाहे रिलायंस पावर को कोई नुकसान न हुआ हो, लेकिन इस वजह से वोकहार्ट हॉस्पिटल, एम्मार एमजीएफ और एसवीइसी कंस्ट्रक्शन के आईपीओ को इतना कम अभिदान मिला कि उन्हें अपने आईपीओ वापस लेना पड़ा।