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Tuesday, 1 April, 2008

महंगाई पर कैबिनेट की आपात बैठक

महंगाई के मोर्चे पर सरकार की अब तक की कोशिशें बेअसर साबित हो रही हैं। इसके लिए आज कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए कैबिनेट की आपातकाल बैठक बुलाई गई है। इसमें महंगाई पर रोक लगाने के लिए कारगार उपायों पर चर्चा होगी। इस वक्त महंगाई दर 13 महीने की सबसे ऊंचे स्तर पौने सात फीसदी पर पहुंच चुकी हैं।
कांग्रेस के साथ यूपीए के सहयोगियों ने भी बढ़ती महंगाई पर वित्तमंत्री से कड़े कदम उठाने की मांग की हैं। कीमतों पर बनी इस कैबिनेट कमेटी की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा, वित्त मंत्री पी चिदम्बरम, कृषि मंत्री शरद पवार, वाणिज्य मंत्री कमलनाथ, और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया होंगे।
गौरतलब है कि सारी कोशिशों के बाद भी लगातर चौथे हफ्ते महंगाई दर में तेज उछाल दिख रहा है। 15 मार्च को खत्म हफ्ते में महंगाई दर 6.68 फीसदी हो गई है। इससे पहले के हफ्ते में महंगाई दर 5.92 फीसदी थी। 59 हफ्ते की ये सबसे ज्यादा महंगाई दर है।

Monday, 31 March, 2008

शेयर बाजार भी आज औंधे मुंह नीचे आए

मुम्बई। महंगाई की चिंता और एशियाई शेयर बाजारों के टूटने से देश के शेयर बाजार भी आज औंधे मुंह नीचे आए। मुम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स अंकों के लिहाज से आठवीं बड़ी गिरावट 727 अंक दर्ज की गई।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने 208 अंक का गोता लगाया। महंगाई को लेकर चारों तरफ मचे हाहाकार के बीच सरकार ने अब यह संकेत दिए हैं कि इसे काबू में करने के लिए यदि आर्थिक विकास की गति को कुछ धीमा भी करना पड़ने तो वह इसके लिए तैयार है। उधर अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंदी का असर पूरे विश्व बाजार पर दिख रहा है। एशियाई शेयर बाजारों में तीव्र गिरावट देखी गई।
चीन का शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स तीन प्रतिशत गिरकर 3,472.713 अंक रह गया। वर्ष 2008 की पहली तिमाही में यह 34 प्रतिशत टूटा है जो 1992 के बाद किसी एक तिमाही की सर्वाधिक गिरावट है। जापान का निक्केई 2.3 प्रतिशत गिरकर 12,525.52 अंक रह गया। इसमें भी 2001 के बाद तिमाही का सर्वाधिक नुकसान हुआ है।देश में महंगाई को कैसे काबू किया जाए, इस पर देर शाम मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक होने जा रही है और सभी की नजर इस बैठक पर टिकी हुई हैं। गौरतलब है कि महंगाई की दर 15 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में 6.68 प्रतिशत पर पहुंच गई जो पिछले 14 माह की सर्वाधिक है।

बीएसई में कारोबार की शुरुआत से ही गिरावट का रुख रहा और बाजार इसके बाद संभल नहीं सका। प्रारम्भ में शुक्रवार के 16,371.29 अंक की तुलना में करीब 150 अंक नीचा खुला सेंसेक्स इससे ऊपर नहीं उठ सका और इसकी तुलना में 763 अंक टूटने के बाद समाप्ति पर मामूली सुधरा और कुल 726.85 अंक अर्थात 4.44 प्रतिशत के नुकसान से 15,664.44 अंक पर बंद हुआ।एनएसई का निफ्टी 207.50 अंक घटकर 4,734.50 अंक रह गया। एशिया के अन्य शेयर बाजारों में हांगकांग का हैंगसैंग भी 1.88 प्रतिशत नीचे आया। ऑस्ट्रेलिया में मामूली बढ़ोतरी थी। सेंसेक्स की तुलना में बीएसई के मिडकैप कम नुकसान दिखा जबकि स्मॉलकैप सुधर गया। मिडकैप 94.47 अंक नीचे तथा स्मॉलकैप 60.36 अंक ऊपर रहा। अन्य सूचकांकों में धातु सूचकांक ने 631.63 अंक का गोता लगाया। इंजीनियरिंग, ऑयल एंड गैस, अचल संपत्ति और बैंकेक्स सूचकांकों में प्रत्येक 400 अंक से अधिक टूटे। कारोबार के दौरान बीएसई में 2,698 कम्पनियों के शेयरों में लेनदेन हुआ। लघु कम्पनियों के शेयरों को मिले समर्थन से बीएसई का रुख सकारात्मक रहा। आधी से अधिक 50.44 प्रतिशत अर्थात 1,361 के शेयर फायदे में रहे जबकि 48 प्रतिशत अथवा 1,295 में नुकसान रहा। मात्र 42 कम्पनियों के शेयरों में स्थिरता थी। सेंसेक्स की तीस कम्पनियों में 26 घाटे और चार में लाभ रहा।ब्याज दरों के फिर से बढ़ने की अटकलों के बीच आवास ऋण उपलब्ध कराने वाली अग्रणी सरकारी कम्पनी एचडीएफसी का शेयर सेंसेक्स में सर्वाधिक नुकसान वाला रहा। इसमें 2,383.75 रुपए पर 8.79 प्रतिशत अर्थात 229.75 रुपए निकल गए। आईसीआईसीआई बैंक 770.10 रुपए पर 7.79 प्रतिशत अर्थात 65.10 रुपए टूट गया।सूचना प्रौद्योगिकी वर्ग की सेंसेक्स से जुड़ी चारों कम्पनियों के शेयरों में नुकसान हुआ। इनमें टीसीएस का शेयर 6.80 रुपए गिरकर 810.90 रुपए रह गया। डीएलएफ, ओएनजीसी, रिलायंस एनर्जी, हिंडाल्को, एचडीएफसी बैंक, जयप्रकाश एसोसिएट्स, हिन्दुस्तान यूनीलीवर, रिलायंस कम्युनीकेशंस, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, एसबीआई, एलएंडटी, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स सेंसेक्स के नुकसान वाले पहले दस शेयरों में शामिल थे।फायदे वाले शेयरों में सिप्ला लिमिटेड में सर्वाधिक 1.01 प्रतिशत अर्थात 2.20 रुपए का फायदा हुआ। इसका शेयर 219.75 रुपए पर बंद हुआ। महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, भारती एयरटेल और आईटीसी लिमिटेड के शेयर सेंसेक्स के अन्य फायदे वाले शेयर रहे।

Friday, 14 March, 2008

सोना 13,000, चांदी 25,000 रुपए पर

नई दिल्ली। यूरो की तुलना में डॉलर के नई तलहटी पर पहुंचने और कच्चे तेल में रिकॉर्ड ऊबाल के समाचारों के बीच स्थानीय सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुएं आज अंतर्राष्ट्रीय बाजार से कदमताल मिलाते हुए नए शिखर पर पहुंच गईं। सोना 320 रुपए की छलांग के साथ 13,000 हजार रुपए प्रति दस ग्राम से ऊपर निकल गया। चांदी 1,600 रुपए की दौड़ से 25,000 हजार को पार करती हुई 25,600 रुपए की नई ऊंचाई पर बंद हुई।लंदन में सोने ने डॉलर की पतली हालत और कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर उफान के चलते 992.70 डॉलर प्रति ट्राय औंस का इतिहास रचने के बाद न्यूयॉर्क के कल के 981.90-982.70 डॉलर की तुलना में करीब दस डॉलर ऊपर 991.60-992.40 डॉलर प्रति ट्राय औंस पर डटा हुआ है।यूरो की तुलना में डॉलर नई तलहटी में हैं और जापानी येन के मुकाबले यह 12 वर्ष के न्यूनतम स्तर पर है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर की यही हालत रही तो विश्व बाजार में सोना जल्दी ही 1,000 डॉलर प्रति ट्राय औंस के आंकड़े को पार कर लेगा।
स्थानीय बाजार में कीमतों में उछाल को देखते हुए ताजी भौतिक मांग करीब-करीब नगण्य है। वैवाहिक मांग की पूर्ति पुराने माल की अदला-बदली से हो रही है।विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान में कीमती धातुओं में उफान मुख्यतः डॉलर की कमजोर स्थिति का नतीजा है। अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश के इस बयान के बावजूद की वह देश की मुद्रा को मजबूत देखना चाहेंगे, डॉलर टूट रहा है। फेडरल रिजर्व की 18 मार्च को होने वाली बैठक में ब्याज दरों में कटौती की प्रबल अटकलें डॉलर को दबाने में विशेष सहयोग कर रही हैं।कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर के आसपास टिकी हुई हैं। लंदन में चांदी के भाव 20.50-20.55 डॉलर प्रति ट्राय औंस हैं।पिछले साल 32 प्रतिशत की छलांग लगाने वाला सोना इस वर्ष अब तक 19 प्रतिशत बढ़ चुका है।स्थानीय बाजार में सोना स्टैंडर्ड 320 रुपए की भारी बढ़त के साथ 13 हजार 200 रुपए प्रति दस ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गया। चांदी टंच (999) हाजिर में 25,600 रुपए प्रति किलो की चोटी पर पहुंच गई।
भाव रुपए में इस प्रकार रहेसोना (प्रति दस ग्राम) स्टैंडर्ड 13,200, बिटुर 13,020गिन्नी (प्रति आठ ग्राम) 10,070चांदी (प्रति किलो) टंच (999) हाजिर 25,600, वायदा 24,600चांदी सिक्का (प्रति सैंकड़ा) लिवाली 26,900, बिकवाली 27,100

Sunday, 9 March, 2008

अमेरिकी मंदी से जार्ज बुश भी चिंतित

वाशिंगटन। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की मंदी के गम्भीर संकट का अनुमान राष्ट्रपति जार्ज।डब्ल्यू.बुश की खुलेआम चिंता व्यक्त करने से सहज लगाया जा सकता है। उन्होंने स्वीकार किया है कि अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है।लगातार दूसरे महीने मंदी के बरकरार रहने के बाद यहां इस तरह की खबरें उड़ने लगी हैं कि क्या इस महीने भी भारी संख्या में लोग बेरोजगार होंगे। बीते फरवरी महीने में यहां इतने लोग बेरोजगार हुए कि पिछले पांच साल का रिकॉर्ड टूट गया।

मंदी की भीषणता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज।डब्ल्यू. बुश को भी वक्तव्य जारी करना पड़ा। शुक्रवार को बुश ने कहा कि वह अर्थव्यवस्था की मंदी से चिंतित हैं।उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मैं जानता हूं कि देश की जनता अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित है और मैं भी इससे चिंतित हूं। यह स्पष्ट है कि हमारी अर्थव्यवस्था धीमी चल रही है लेकिन हमें अच्छी खबर का इंतजार करना चाहिए। बुश ने कहा कि सरकार की तरफ से जो कदम उठाए जा रहे हैं, उसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे और उसका अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

हालांकि पेंसिलविनिया के नेरोफ इकोनॉमिक एडवाइजर इंक के अर्थशास्त्री जोएल नेरोफ कहते हैं, “यह प्रश्न नहीं है कि हम लोग मंदी की तरफ बढ़ रहे हैं बल्कि सवाल यह उठता है कि मंदी की अवधि कितनी लम्बी होगी और इसकी चपेट में कितने लोग आएंगे।”अमेरीकी श्रम विभाग की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी में 63,000 लोगों की नौकरी जा चुकी है। इससे पहले जनवरी में 22 हजार लोगों को रोजगार गंवाना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि इन आंकड़ों में खेती-बाड़ी से जुड़े रोजगार शामिल नहीं हैं। वॉल स्ट्रीट के अर्थशास्त्री का कहना है कि मार्च में बेरोजगारों की संख्या फरवरी से बढ़ सकती है। उनके मुताबिक फरवरी के बेरोजगारों में 25 हजार की संख्या और जुड़ सकती है।

हालांकि पेंसिलविनिया के नेरोफ इकोनॉमिक एडवाइजर इंक के अर्थशास्त्री जोएल नेरोफ कहते हैं, “यह प्रश्न नहीं है कि हम लोग मंदी की तरफ बढ़ रहे हैं बल्कि सवाल यह उठता है कि मंदी की अवधि कितनी लम्बी होगी और इसकी चपेट में कितने लोग आएंगे।”अमेरीकी श्रम विभाग की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी में 63,000 लोगों की नौकरी जा चुकी है। इससे पहले जनवरी में 22 हजार लोगों को रोजगार गंवाना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि इन आंकड़ों में खेती-बाड़ी से जुड़े रोजगार शामिल नहीं हैं। वॉल स्ट्रीट के अर्थशास्त्री का कहना है कि मार्च में बेरोजगारों की संख्या फरवरी से बढ़ सकती है। उनके मुताबिक फरवरी के बेरोजगारों में 25 हजार की संख्या और जुड़ सकती है।

Monday, 3 March, 2008

डॉलर के मुकाबले रुपया 38 पैसे लुढ़का

मुम्बई। शेयर बाजारों के औंधे मुंह नीचे आने और निर्यात की तुलना में आयात तेजी से बढ़ने के समाचारों के बीच अंतर बैंकिंग विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया पूरी तरह दबाव में आ गया। सत्र की समाप्ति पर एक डॉलर की कीमत शुक्रवार की तुलना में 38 पैसे बढ़कर पांच माह के उच्च स्तर 40.39-40.40 रुपए पर पहुंच गई।डीलरों के अनुसार अल्पकालिक लिहाज से रुपया मजबूत दिख रहा है। शेयर बाजारों की पतली हालत को देखते हुए आयातक और अन्य लोग डॉलर की खरीदारी में जुटे हुए हैं। पिछले चार माह के दौरान एक दिन के कारोबार में रुपए में यह सर्वाधिक गिरावट है। शुक्रवार को एक डॉलर का भाव 40.01-40.02 रुपए था।मुम्बई शेयर बाजार (बीएसई) के सेंसेक्स में आज अंकों के लिहाज से दूसरी बड़ी गिरावट देखी गई।शेयर बाजारों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाने वाले विदेशी निवेशक निरंतर बिकवाल बने हुए हैं। पिछले साल विदेशी निवेशकों ने 17 अरब 40 करोड़ डॉलर का निवेश किया था जबकि इस वर्ष यह करीब तीन अरब डॉलर के बिकवाल रहे हैं। पिछले दो माह के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया दो प्रतिशत तक कमजोर पड़ चुका है।डीलरों का कहना है कि निर्यात की तुलना में आयात में अधिक बढ़ोतरी से व्यापार घाटा बहुत अधिक हो गया है।