डीएसपी मेरिल लिंच के एंड्रयू हॉलैंड का कहना है कि जब तक अमेरिका की स्थिति अच्छी नहीं हो जाती है तब तक विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाजार में अपनी भागिदारी नहीं बढ़ाएंगे।
उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है किस वित्तीय संस्थान की स्थिति खराब होगी। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जीडीपी की दर इस साल 8-9 फीसदी रहेगी।
एंड्रयू हॉलैंड ने ‘सीएनबीसी-टीवी18’ से खास बातचीत की:-
सवाल: बाजार की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। वैश्विक नजरिए को ध्यान में रखें तो अभी भारत की स्थिति कैसी है?
जवाब: सबसे पहले यह देखना होगा कि फेडरल रिजर्व आज ब्याज दर में कितनी कटौती करता है। लेकिन ब्याज दर में जो कटौती हो रही है उसका प्रभाव पूरी तरह अर्थव्यवस्था में आने में समय लगेगा। इसलिए अभी सब इस ओर देख रहे हैं कि किधर से नई समस्या आ रही है। इन्हीं कारणों से हम बाजार में इस स्थिति में हैं।
यह सही है कि बेयर स्टंर्स की समस्या थोड़ी गहरी थी। इसने वित्तीय बाजार की खस्ता हालत को उजागर किया। हालांकि इससे बचने के लिए जेपी मॉर्गन और फेडरल रिजर्व ने कदम भी उठाए। अब सभी की नजर इस पर है कि इस तरह की अगली समस्या किस ओर से आने वाली है। इन सभी कारणों से बाजार में इस तरह की स्थिति हो गई है।सवाल: इस तरह की समस्या अगले कुछ हफ्तों में भी आ सकती है? ऐसा लग रहा है कि लीमन ब्रदर्स भी इसका शिकार हो सकता है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि और भी निवेश बैंक दिवालियेपन की कगार पर पहुंच सकते हैं?जवाब: इस समस्या के बारे में कोई बता नहीं सकता। आप इसकी उम्मीद कर सकते हैं या अटकलें लगा सकते हैं। लेकिन जब तक इन कम्पनियों की तरफ से इस तरह की खबरें नहीं आती है कुछ भी कहना मुश्किल है।
मेरे हिसाब से अभी जो समस्या है वो सामान्य मंदी से अलग है, जहां आप पता कर सकते हैं कि समस्या कहां है। लेकिन फिलहाल की समस्या चारों तरफ फैली हुई है। इसलिए वित्तीय संस्थानों की समस्या का असर अमेरिका के अलावा एशिया और यूरोप सभी जगह हो रहा है। ऐसे में आप नहीं समझ सकते की समस्या कहां है।

