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Wednesday, 27 February, 2008

शुरुआती बढ़त संभाल नहीं पाए शेयर बाजार

मुम्बई। देश के शेयर बाजारों में कारोबार की शुरुआत में जोरदार बढ़त सीमेंट, सूचना प्रौद्योगिकी और धातु कम्पनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहने से लगभग गायब हो गई। मुम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स मात्र 20 अंक ऊपर रहा जबकि नेशनल स्टॉ एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी दो अंक नीचे था।अमेरिका में गत दिवस की बढ़त और एशियाई शेयर बाजारों की तेजी के चलते यहां भी बाजार ऊंचे खुले और दोपहर से पहले अच्छी बढ़त बनाए रखने में सफल थे। इसके बाद ऊंचे भावों पर मुनाफावसूली और कल वायदा एवं निपटान कारोबार की समाप्ति को देखते हुए कारोबारियों के अपने सौदे समेटने में व्यवस्था हो जाने पर बाजार सुस्त पड़ गया।
बीएसई का सेंसेक्स कल के 17,806.19 अंक की तुलना में करीब 176 अंक ऊपर 17,983.42 अंक पर खुला और लगभग 150 अंक और बढ़कर ऊंचे में 18,137.28 अंक तक जाने के बाद बिकवाली दबाव से 360 अंक घटकर नीचे में 17,770.65 अंक तक गिरा और समाप्ति पर कुछ सुधरकर कुल 19.80 अंक अर्थात 0.11 प्रतिशत ऊपर 17,825.99 अंक पर बंद हुआ।एनएसई का निफ्टी कारोबार के दौरान ऊंचे में 5,368.15 तथा नीचे में 5,249.75 अंक तक गिरने के बाद 1.65 अंक अर्थात 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट से 5,268.40 अंक का रह गया।
बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप में क्रमश 32.70 तथा 25.37 अंक की हल्की बढ़त रही। इंजीनियरिंग सूचकांक 382.31 अंक चढ़ा जबकि सूचना प्रौद्योगिकी 89.55, धातु 159 अंक टूट गए। अचल सम्पत्ति में 36.77 अंक की गिरावट थी।कारोबारियों का कहना है कि निवेशकों की निगाह 29 फरवरी को पेश होने वाले 2008-09 के आम बजट पर भी है।
सत्र के दौरान बीएसई में 2,805 कम्पनियों के शेयरों में कामकाज हुआ। इसमें आधे से अधिक अर्थात 51.12 प्रतिशत यानि 1,434 कम्पनियों के शेयर बढ़े जबकि 1,292 अर्थात 46.06 प्रतिशत में नुकसान था। शेष 79 कम्पनियों के शेयरों में कोई घटबढ़ नहीं थी। सेंसेक्स में हल्की बढ़त के बावजूद इसमें शामिल तीस कम्पनियों में से 16 नुकसान में रहीं।सेंसेक्स की घाटे वाली कम्पनियों में सीमेंट की अग्रणी ग्रासिम इंडस्ट्रीज का शेयर 5.06 प्रतिशत अर्थात 154.05 रुपए गिरकर 2,888.65 रुपए का रह गया। रिलायंस एनर्जी के शेयर में 1,631.35 रुपए पर 3.88 प्रतिशत अर्थात 65.90 रुपए निकल गए।
सूचना प्रौद्योगिकी वर्ग की चारो बड़ी कम्पनियां – सत्यम कम्प्यूटर, इन्फोसिस टेक्नोलॉजिस, टीसीएस और विप्रो लिमिटेड के शेयर घाटे में रहे। एसीसी लिमिटेड, एसबीआई, बजाज ऑटो, रिलायंस कम्युनिकेशंस, अम्बुजा सीमेंट, डीएलएफ, एनटीपीसी, हिंडाल्को, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और हिन्दुस्तान यूनिलीवर के शेयर भी घाटे में रहे।लाभ वाली श्रेणी में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा का शेयर 4.52 प्रतिशत अर्थात 28.50 रुपए के फायदे से 658.65 रुपए पर पहुंच गया। एचडीएफसी, रैनबैक्सी लैब, भेल, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, आईटीसी, टाटा स्टील और सिप्ला फायदे वाले शेयरों में शामिल थे। सूचना प्रौद्योगिकी वर्ग की चारो बड़ी कम्पनियां – सत्यम कम्प्यूटर, इन्फोसिस टेक्नोलॉजिस, टीसीएस और विप्रो लिमिटेड के शेयर घाटे में रहे। एसीसी लिमिटेड, एसबीआई, बजाज ऑटो, रिलायंस कम्युनिकेशंस, अम्बुजा सीमेंट, डीएलएफ, एनटीपीसी, हिंडाल्को, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और हिन्दुस्तान यूनिलीवर के शेयर भी घाटे में रहे।लाभ वाली श्रेणी में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा का शेयर 4.52 प्रतिशत अर्थात 28.50 रुपए के फायदे से 658.65 रुपए पर पहुंच गया। एचडीएफसी, रैनबैक्सी लैब, भेल, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, आईटीसी, टाटा स्टील और सिप्ला फायदे वाले शेयरों में शामिल थे।

Monday, 11 February, 2008

रिलायंस पावर का शेयर 430 रुपए पर सूचीबद्ध

रिलायंस पावर का शेयर आज अपने इश्यू मूल्य 450 रुपए के मुकाबले 20 रुपए की हल्के डिस्काउंट के साथ 430 रुपए पर सूचीबद्ध हो गया।यह शेयर एनएसई वायदा कारोबार (एफएंडओ) का भाग है, इसका लॉट साइज 450 शेयर का है और इसकी कीमत 10-1350 रुपए के बीच रखी गई है।कम्पनी ने पूंजी बाजार में 26 करोड़ इक्विटी शेयर (प्रत्येक 10 रुपए) के साथ प्रवेश किया है। रिलायंस पावर का शेयर तकरीबन 70 गुना ज्यादा खरीदा गया था।रिलायंस पावर, रिलायंस एडीएजी समूह की बड़ी कम्पनी है जो ऊर्जा उत्पादन और वितरण का काम करती है। कम्पनी वर्तमान में 12 ऊर्जा परियोजनाओं का विकास कर रही है, जिनकी कुल क्षमता 28,000 मेगावाट की है।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ‘जी-सात’ चिंतित

टोक्यो। दुनिया के सात विकसित देशों के मंच समूह ‘जी-सात’ के वित्त मंत्रियों ने अमेरिकी गृह ऋण बाजार के ध्वस्त होने पर चिंता व्यक्त करते हुए आज कहा कि इससे विश्व अर्थव्यवस्था को भी आघात पहुंचा है तथा ऋण बाजार के संकट में फंसे बैंकों के लिए ब्याज दर में कटौती जैसे कदमों से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।धनी देशों के वित्त मंत्रियों को उम्मीद है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था 2008 में मंदी में जाने से बच सकती है लेकिन वैश्विक वृद्धि दर को बचाए रखने तथा तथा बाजार की मजबूती बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरुरत है। जी-7 के इस सम्मेलन में इन देशों के केन्द्रीय बैंकों के प्रमुख भी शामिल हुए।सम्मेलन में कई देशों का कहना था कि चीनी मुद्रा युआन के कमजोर होने के कारण चीन व्यापार में गलत लाभ उठा रहा है। इन देशों ने चीन से अपनी विनिमय दर ठीक करने की मांग करते हुए कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में संतुलन के लिए उसे घरेलू निवेश बढ़ाना चाहिए। इन देशों ने तेल निर्यातक देशों से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने को कहा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पिछले माह रिकॉर्ड 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी।जी-सात के अक्टूबर में जारी घोषणापत्र में जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगातार पांचवें वर्ष मजबूत होने की बात कहीं गई थी वहीं आज अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत ज्यादा चुनौतीपूर्ण तथा अनिश्चित माहौल वाला बताया गया। आज के घोषणापत्र में वैश्विक आर्थिक विकास दर में जोखिम की पहचान, अमेरिकी आवास बाजार में मची उथल-पुथल, ऋण की कटौती और वित्तीय बाजार में लम्बे समय से जारी उथल-पुथल का जिक्र किया गया। फिलहाल हर देश को उसकी जरूरत के अनुसार उचित वित्तीय एवं मौद्रिक उपाय करने को कहा गया।घोषणा पत्र में अमेरिकी और यूरोपीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती से उत्पन्न संकट को गम्भीर मुद्दा माना गया है पर इस पर इस मुद्दे के समाधान की बात फिलहाल अप्रैल तक के लिए टाल दी गई है।सदस्य देशों ने जहां बाजार में जारी संकट से उबरने के उपायों की योजना बनाई वहीं अमेरिका के वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन ने वित्त बाजार की मौजूदा उथल-पुथल को एक गम्भीर मसला बताया। पॉलसन ने उम्मीद जताई कि वित्त बाजार मौजूदा संकट के दौर से उबर जाएगा लेकिन अस्थिरता जारी रह सकती है।इटली के वित्त मंत्री टोमासो पडोगा शिओपा ने जी-सात की पिछली बैठक का जिक्र करते हुए कहा, “इस समय अक्टूबर से कहीं ज्यादा निराशा और चिंता का माहौल है।” फ्रांस की वित्त मंत्री किस्टीन लागार्डे ने ऋण बाजार मे संकट के मुद्दे को फिलहाल टालने के फैसले पर खुशी जाहिर की। जर्मनी के वित्त मंत्री पीर स्टेनब्रुरेक ने कहा कि बैकों ने ब्याज दरों में कटौती की है क्योंकि उनका घाटा 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने आशंका जताई कि यह घाटा 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।जी-सात देशों ने बाजार के कामकाज को सामान्य रूप से संचालित करने के लिए बैंकों से अपने घाटों तथा बैलेंस शीट का पूरी तरह खुलासा करने को कहा।अमेरिका, कनाडा, जापान, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और जर्मनी समूह सात के सदस्य देश हैं।