Monday, 11 February, 2008

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ‘जी-सात’ चिंतित

टोक्यो। दुनिया के सात विकसित देशों के मंच समूह ‘जी-सात’ के वित्त मंत्रियों ने अमेरिकी गृह ऋण बाजार के ध्वस्त होने पर चिंता व्यक्त करते हुए आज कहा कि इससे विश्व अर्थव्यवस्था को भी आघात पहुंचा है तथा ऋण बाजार के संकट में फंसे बैंकों के लिए ब्याज दर में कटौती जैसे कदमों से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।धनी देशों के वित्त मंत्रियों को उम्मीद है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था 2008 में मंदी में जाने से बच सकती है लेकिन वैश्विक वृद्धि दर को बचाए रखने तथा तथा बाजार की मजबूती बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरुरत है। जी-7 के इस सम्मेलन में इन देशों के केन्द्रीय बैंकों के प्रमुख भी शामिल हुए।सम्मेलन में कई देशों का कहना था कि चीनी मुद्रा युआन के कमजोर होने के कारण चीन व्यापार में गलत लाभ उठा रहा है। इन देशों ने चीन से अपनी विनिमय दर ठीक करने की मांग करते हुए कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में संतुलन के लिए उसे घरेलू निवेश बढ़ाना चाहिए। इन देशों ने तेल निर्यातक देशों से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने को कहा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पिछले माह रिकॉर्ड 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी।जी-सात के अक्टूबर में जारी घोषणापत्र में जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगातार पांचवें वर्ष मजबूत होने की बात कहीं गई थी वहीं आज अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत ज्यादा चुनौतीपूर्ण तथा अनिश्चित माहौल वाला बताया गया। आज के घोषणापत्र में वैश्विक आर्थिक विकास दर में जोखिम की पहचान, अमेरिकी आवास बाजार में मची उथल-पुथल, ऋण की कटौती और वित्तीय बाजार में लम्बे समय से जारी उथल-पुथल का जिक्र किया गया। फिलहाल हर देश को उसकी जरूरत के अनुसार उचित वित्तीय एवं मौद्रिक उपाय करने को कहा गया।घोषणा पत्र में अमेरिकी और यूरोपीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती से उत्पन्न संकट को गम्भीर मुद्दा माना गया है पर इस पर इस मुद्दे के समाधान की बात फिलहाल अप्रैल तक के लिए टाल दी गई है।सदस्य देशों ने जहां बाजार में जारी संकट से उबरने के उपायों की योजना बनाई वहीं अमेरिका के वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन ने वित्त बाजार की मौजूदा उथल-पुथल को एक गम्भीर मसला बताया। पॉलसन ने उम्मीद जताई कि वित्त बाजार मौजूदा संकट के दौर से उबर जाएगा लेकिन अस्थिरता जारी रह सकती है।इटली के वित्त मंत्री टोमासो पडोगा शिओपा ने जी-सात की पिछली बैठक का जिक्र करते हुए कहा, “इस समय अक्टूबर से कहीं ज्यादा निराशा और चिंता का माहौल है।” फ्रांस की वित्त मंत्री किस्टीन लागार्डे ने ऋण बाजार मे संकट के मुद्दे को फिलहाल टालने के फैसले पर खुशी जाहिर की। जर्मनी के वित्त मंत्री पीर स्टेनब्रुरेक ने कहा कि बैकों ने ब्याज दरों में कटौती की है क्योंकि उनका घाटा 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने आशंका जताई कि यह घाटा 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।जी-सात देशों ने बाजार के कामकाज को सामान्य रूप से संचालित करने के लिए बैंकों से अपने घाटों तथा बैलेंस शीट का पूरी तरह खुलासा करने को कहा।अमेरिका, कनाडा, जापान, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और जर्मनी समूह सात के सदस्य देश हैं।

0 comments: